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ट्रॅफिक पुलिस ने कहा महामार्ग पर नहीं चलाते देखा महिला को कार

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   हैदराबाद की ट्रेनर से बातचीत में उजागर हुआ उच्च   संस्कृति का शोषण               औंरगाबाद-जलगांव राष्ट्रीय महामार्ग पर अचानक शहर के मुहाने पर यातायात पुलिस एक महिला को कार आंध्रप्रदेश पासिंग की कार चलाते देख कागजों की पुछताछ के लिए रोकता है। महिला चालक के पडोस की सीट में बैठे बुर्जूग व्यक्ती के दरवाजा खोलते ही यातायात पुलिस बडे अदद के साथ उन्हें बैठे रहने का इशारा करता है और महिला चालक से कागजों की जांच पडताल करने लगता है। सब कुछ व्यवस्थीत होने पर यातायात पुलिस कर्मी धन्यवाद अदा करते हुए बताता है की महामार्ग पर लंबी यात्रा के लिए किसी महिला को गाडी चलाते नहीं देखा। इस पर कार चला रही लगभग ४५ वर्षीय महिला ने हैदराबाद की फ्रेंच भाषा व व्यक्तीत्व विकास की ट्रेनर श्रीमती शुभा भसीन सेठ के रुप में अपना परिचय देते हुए बताया की नांदेड से औंरगाबाद होते हुए जलगांव तक ३ बार यातायात पुलिस कर्मीओं ने उन्हें रोकते हुए यही आश्चर्य व्यक्त किया है। यह परिवार खानदेश में एक समारोह में सम्मिलित होने निक...

धन्यवाद ज़िंदगी

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फेसबुक पर फैल रहे अश्लील वाईरस से लोगों की छवि धुमिल

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    फेसबुक पर फैल रहे अश्लील वाईरस से लोगों की छवि धुमिल,        विशेषज्ञों ने सचेत रहते हुए दी पासवर्ड बदलने की सलाह       सोमवार को जलगांव सहित देशभर के फेसबुक युजर्स अश्लील वाईरस को लेकर अच्छे खासे परेशान दिखाई दिये। परेशानी का आलम यह था कि लोग एक दूसरे को फोन करके संबंधित अश्लीलता के बारे में आगाह करते दिखाई दिये। फेसबुक पर इन दिनों विगत कुछ समय यां जनवरी माह से कईं प्रकार के अश्लीम मैसेज, चित्र आदि अचानक पोस्ट हो रहे है। जिसको लेकर फे सबुक युजर्स, फे सबुक प्रयोग कर्ता अपने मित्रों के बारे में गलत राय बना ले रहे है। और इन गलत फहमियों की बदौलत लोगों में आपस में ही द्वेष निर्माण होने लगा है। आईटी क्षेत्र व सॉफ्टवेअर से जुडे विपुल पंजाबी, विशाल मंत्री ने बताया कि विगत दो-तीन दिन से फे सबुक पर अश्लील से वीडिओ, फोटो आदि अपने आप किसी के नाम पर अपलोड हो रहे है। इतना ही नहीं यह सारी सामग्री फेसबुक युजर्स के मित्रों, परिजनों आदि को अपने आप ही टैग कर ले रहे है। जिसकी जानकारी फेसबुक खाता धारक को नहीं मिल पाती...

खानदेश की प्रचलित स्वांग लोककला

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                           खानदेश की प्रचलित स्वांग लोक कला                        खानदेश में विठ्ठल,बालाजी, प्रभु श्री राम आदि के रथोत्सव निकाले जाने की परंपरा है।इन रथोत्सव में मोर पंख धारी स्वांग की लोककला प्रस्तुत की जाती है। परंपराओं के आधार पर लोककथाओं के पात्र के रूप में भवानी देवी व भूर राक्षस के युद्ध संवाद को प्रस्तुत करने वाले स्वांग बडी संख्या में प्रस्तुत किए जाते हैं ।  अथाह भीड के बीच यह मोर पंख धारी स्वांग सभी का आकर्षण बनते हैं । रथोत्सव के दौरान एक दिन पहले से कुल तीन दिन तक के लिये इन स्वांग धारी भवानी स्वरूप की बडी संख्या में प्रस्तुती रहती है। स्वांग की इस लोककला में सिर्फ पुरूष वर्ग अपनी मन्नत पुरी करने के लिए देवी मां भवानी का स्वांग यां स्वरूप लेकर अपने मुखमंडल पर सिंदूर लगाकर, दैत्य और मां भवानी के बीच होने वाले युद्ध ...

किताबों में मुरझाए फूल मिले..

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   किताबों में मुरझाये हुए कुछ फू ल मिले  याद आया जमाना जब थे यह फूल खिले रोशनी आंखों में चमक सी लगती थी तब  दोपहर की धूप भी ठंडक देती थी  तब   याद आया बहुत सा गुजरा जमाना कोने वाली अम्मी का चिडिय़ों को दाना चुगाना मां का नम आंखों से चूल्हे को फूं क कर जलाना देगची से उबलती दाल का पानी यह सब बातें याद दिला रही हैं कहानी                         किताबों में मुरझाये हुए कु छ फू ल मिले        भूतकाल की कल्पना लिये मानो भविष्य से मिले        आज वर्षों बाद जवानी की यादों के फूल खिले        किताबों में मुरझाये हुए कुछ फू ल मिले       किताबों में दबे फूल की सुगंध       महका रही है अब भी मन को      वो बेपरवाही, शरारत, उकेर रही अक्खडपन को      पांच-दस पैस...

पदमालय तीर्थ स्थल में गणेशजी से जुडी है अलौकिक कथाएं

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    विराजमान है बाएं व दाएं सूंडवाले गणेशजी                                               जलगांव शहर से लगभग ३० किलोमीटर की दूरी  एरंडोल तहसील में  स्थित पदमालय तीर्थ स्थल गणेशोत्सव के दौरान एक बडे श्रध्दा का केंद्र बना हुआ है। आमतौर पर वर्ष भर पदमालय तीर्थ स्थल पर श्रध्दालुओं का आगमन होता है। किंतु गणेशोत्सव के दौरान पदमालय में विराजमान बाएं व दाएं सूंडवाले गणेशजी की मूर्ति का दर्शन श्रध्दालुओं को एक वरदान समान प्राप्त होता है। पदमालय तीर्थ स्थल की कई अलौकिक बाते इसे और भी महत्वपूर्ण बना देती है। खान्देश के इस पुरातन मंदिर में चांदी के सिंहासन पर गणेशजी की बाएं व दाएं सूंडवाली  मूर्ति रत्नों से सजी विराजमान है। मंदिर संस्थान के विश्वस्तों का कहना है कि, महाराष्ट्र के अष्टविनायक की तरह मान्यता रखनेवाले इस तीर्थ को ढाई पीठ के आधे पीठ के रुप में जाना जा...

खान्देश भर में मनाया गया कृषिपर्व पोला, आधुनिकता की दौड में सजे हुए बैल प्रस्तुत कर रहे थे अनोखापन

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  जलगांव शहर सहित पूरे खानदेश में  सोमवार २५ अगस्त को कृषिपर्व के रुप में पोला उत्सव मनाया गया। इस वर्ष समाधान कारक बारिश होने के बावजुद पोला पर्व पर कुछ खास उत्साह दिखाई नहीं पडा। किन्तू परंपराओं को जारी रखते हुए पोला पर्व मनाया गया। आगामी दिनों में चुनाव की सरगर्मियां देखते हुए भी पोला पर्व पर प्रभाव देखा गया। जिले में इस त्यौहार की तैयारियों के लिए एक पखवाडे से लोगों की भागदौड प्रारंभ हो गई थी। शनिवार को शहर के बाजार क्षेत्र में पोला पर्व की खरिददारी देखी गई। रविवार को बाजार बंद होने के बावजुद भी छुटपुट खरीददार दिखाई दिये। खान्देश सहित संपूर्ण महाराष्ट्र में मनाये जाने की परंपरा है। आम तौर पर महाराष्ट्र के कृ षि प्रधान क्षेत्रों में पोला उत्सव बडी धुमधाम व श्रध्दा के साथ मनाया जाता है। महाराष्ट्र के अलावा छत्तीसगढ व अन्य राज्यों में भी पोला उत्सव मनाने की परंपरा है। पोला पर्व भादो मास की अमावस्या को मनाया जाता है। इसे पोला पाटन व कुशोत्पाटनी आदि नाम से भी जाना जाता है। पोला त्यौहार में किसानों द्वारा अपने पशूधन खासतौर से बैल आदि की  पूजा, प्रतिष्ठा कर अपने पशु धन क...