भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु बाबूजी से मिलने दो बार चालीसगांव आये थे. बताते है कि 48 साल तक केकी मुस उर्फ़ बाबूजी ने चालीसगांव से बाहर सिर्फ दो बार कदम रखा. एक बार मां की मृत्यु पर उन्हें औरंगाबाद जाना पड़ा. दूसरी बार जब वे अपने बंगले से निकलकर चालीसगांव रेलवे स्टेशन पर विनोबा भावे की तस्वीर लेने आये. मां ने पहचानी प्रतिभा - चालीसगांव में केकी मूस के पिता सोडा वाटर की फैक्टरी के साथ-साथ शराब की दुकान चलाते थे. बेटा कला की पढ़ाई करने विदेश जाना चाहता था. पर मां-बाप इकलौते बेटे को इतनी दूर भेजने के लिए तैयार नहीं थे. वर्ष 1934-35 में पिता की मौत के बाद मां पिरोजाबाई ने फैक्टरी की जिम्मेदारी अपने कंधे लेते हुए बेटे को इंग्लैण्ड जाने की इजाजत दे दी. चालीसगांव में अब केकी मूस उर्फ़ बाबूजी के नाम पर उनके कुछ साधकों द्वारा केकी मूस आर्ट ट्रस्ट चलाया जा रहा है. ट्रस्ट के सचिव कमलाकर सामंत ने बताया कि बाबू जी ने 300 से अधिक राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीते थे . लेकिन उनके जीते जी यह बात कि...
हिंदी के प्रख्यात व्यंगकार डा.शंकर पुणतांबेकर का निधन हिंदी साहित्य में व्यंग्यविधा के पुरोधा कहे जाने वाले डा.शंकर पुणतांबेकर का रविवार ३१ जनवरी दोपहर १.३० बजे निधन हो गया। वह ९२ वें वर्ष के थे। हाल ही में विगत ८ जनवरी २०१६ को उन्होने अपना जन्म दिन मनाया। शंकर पुणतांबेकर के उपरांत उनके तीन बेटे, बेटी, बहुएं, नाती पोते से भरा पुरा परिवार मौजुद है। साहित्य क्षेत्र में व्यंग्य लेखक के रूप में एक बडा नाम डा.शंकर पुणतांबेकर रहन सहन में एक साधारण व्यक्तीत्व व असाधारण प्रतिभा थे। उनका जन्म मध्यप्रदेश के गुणा जिले के कुंभराज में वर्ष १९२५ में हुआ था। शंकर रघुनाथ पुणतांबेकर के रूप में प्रचलित साहित्यकार की प्राथमिक शिक्षा, दिक्षा, विदिशा, ग्वालियर व आग्रा में हुई। उन्होने हिंदी में पीएच.डी. करते हुए जलगांव के मुलजी जेठा महाविद्यालय में वर्ष १९६० से १९८५ तक लगातार २५ वर्ष अध्यापन कार्य किया। वर्ष १९८५ में अवकाश प्राप्ती के उपरांत वह सीधे साहित्य सेवा व ...
गणितज्ञ भास्कराचार्य जयती पर विशेष - गणितज्ञ भास्कराचार्य का जलगांव जिले से बहुत बडा संबंध बताया जाता है। गणित व खगोलशास्त्र के अध्ययन में भास्कराचार्य को जलगांव जिले में ही प्रगती मिलने के साक्ष्य भी मौजूद है। इतिहास में इसवी सन ११५ ३ से ५४ के बीच जलगांव जिले के चालीसगांव तहसील में स्थित पाटणादेवी परिसर में मिले संस्कत शिला लेखों में खगोलशास्त्री भास्कराचार्य का उल्लेख प्राप्त होता हेै। भास्कराचार्य के पौत्र के रूप में चांगदेव ने भी बडे ज्योतिष होने का सम्मान इसी जिले में प्राप्त किया। पूराने शिलालेखों के अनुसार चांगदेव ने अपने दादा के सिद्धांत शिरोमणी व अन्य ग्रंथों के अध्ययन के लिये पाटणा परिसर में एक बडा मट निर्माण करने की भी इतिहास में जानकारी मौजूद है। इतिहास कारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रिय किर्ती के प्रख्यात गणितज्ञ, खगोल शास्त्री भास्कराचार्य चालीसगांव के पाटणे यां पाटणा देवी परिसर में सन १११० से ११८५ तक निवास करते थे। भास्कराचार्य ने इसी स्थान पर अपनी विधवा बेटी लिलावती के लिये गणित शास्त्र पर गं्रथ लिखा था। सिद्धांत शिरोमणी गं्रथ...
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