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जन्मदिन की हार्दिक शुभ कामना बच्चा लोग

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मार्च माह के आगमन के साथ ही मानो मेरे लिए पर्व माह की शुरुवात हो जाती है ।
आज एक मार्च को मेरी छोटी बिटिया यानी मेरे बेटे " कनक " का जन्मदिन होता है । एक नटखट सा जल्दी ही सबमें घुलमिल जाने वाला व्यक्तित्व, अपने माता-पिता के अलावा सबकी आँखों का तारा, सबका प्यारा है । मंच सञ्चालन, प्रस्तुति  के लिए कनक कभी भी तैयार रहती है ।

तीन मार्च को मेरे छोटे भाई विपुल का जन्मदिन है । प्रोफ़ेसर साहब छोटे होने के कारण हमारी पीढ़ी के लाडले हैं ।



सत्तरह मार्च को मेरी बड़ी बिटिया वंशिका का जन्मदिन है । बांसुरी का तात्पर्य रकने वाले नाम उच्चारण की वंशिका का कला में कोई सानी नहीं है । कम उम्र में उम्दा कला की साधना को पाने का उसका सफल प्रयास है । गणेश जी की मिटटी की प्रतिमा बनाना सीख कर “वंश” ने दूसरों को भी सिखाना प्रारंभ किया ।
वैसे कहते हैं की मार्च में जन्मे लोग जिम्मेदारियों का निर्वाह बहुत अच्‍छे तरीके से करते हैं, इसलिए कामयाबी इनके कदम चूमती है। किसी भी विषय पर बोलने या लिखने से पहले ये उसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लेते हैं । कहा यह भी जाता है की यह लोग  कानून और नियमों को मानने वाले …

भोर की पहली किरण

भोर की पहली किरण 
पक्षियों का कलरव 
चाह कर भी बिस्तर
से न निकले का मन 
                          उमंग उत्साह के पन्नो 
                          की उधेड़ बुन में
                          दिन भर के
                          ताने बाने बुनते हुए
                          न जाने कब सुबह हो गई..
थकान और पसीने की
बदबू, मिटटी की सौंधी
खुशबु
गोधुली पर गोरज से
माथा सजाये
लौट कर थकान
कैसे मिटायें
                          इस धीमी सोच में
                          सूरज ढल गया
                          घर पहुंचा तो
                          तेरा मुस्कुराता चेहरा देख
                          दिन भर का सारा कशमकश
                          रफूचक्कर हो गया
तेरी यह मुस्कान ही
मेरे जीने का अदब है..
गुनगुना रहा हूँ यह गीत
तू ही मेरा जीवन है...
                              विशाल

मातैय - माते त्वानू लखा, करोड़ा प्रणाम

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मातैय - माते त्वानू लखा, करोड़ा प्रणाम परमपूजनीय दादी माँ को हम सब के बीच से गए हुए दो वर्ष हो गया.. वक्त तेज़ी से भागता चला जाता है किन्तु चिर-स्मृतियाँ छोड़ता चला जाता है. यह कहना कठिन है की समय के साथ सबकुछ भुलाया जाता है. क्योंकि सीख जीवन के हर मोड़ पर एक राह , हिम्मत बनकर कड़ी दिखाई देती है.  अबके अत्यधिक प्रगतिवादी माहोल में भी हमारे उन अशिक्षीत बुजुर्गों के तजुर्बे एक ढाल की तरह सामने आते हैं. फिर हम कैसे कह सकते हैं की की समय सब कुछ भुला देता है.

http://aakrosh-sanwad.blogspot.in/search?updated-min=2015-01-01T00:00:00-08:00&updated-max=2016-01-01T00:00:00-08:00&max-results=13
पूज्यनीय दादी जी को परिवार के सभी सदस्य माताजी, मातैय यां माते कहते थे . मातैय शब्द पंजाबी का अपभ्रंश है , और भी कई शब्दों को तोड़ मरोड़ कर बोला जाता है. खैर  मातैय हमारे बीच समाये हुए हैं, हम गौरवान्वित हैं ऐसे महान व्यक्तित्व के बच्चे हो कर..  आप हर समय हमारे स्मरण में रहेंगे. किन्तु आज आपके पुण्यस्मरण पर बस इतना ही मातैय - माते त्वानू लखा, करोड़ा प्रणाम..

बस मीठा मीठा बोलो

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शीर्षक से याद आया की टीना मुनीम और देव आनंद अभिनीत फिल्म ‘मनपसंद’ सन 1980 में प्रदर्शित हुई थी। इसमें मोहम्मद रफ़ी द्वारा गाया, राजेश रोशन के संगीत से सजा एक गीत था ...
लोगो का दिल अगर हा जितना तुमको है तो बस मीठा मीठा बोलो लोगो का दिल अगर हा जितना तुमको है तो बस मीठा मीठा बोलो
चले है जैसे कहीं शीशे पे आरी कानो को लगे है आवाज़ तुम्हारी चले है जैसे कहीं शीशे पे आरी कानो को लगे है आवाज़ तुम्हारी कहना है कुछ अगर तो बोलो में मिशरी घोलो बस मीठा मीठा बोलो
साज़ छुपा है जब सीना-ए-दिल में गीत तुम्हारे है तो फिर मुश्किल में साज़ छुपा है जब ई-ए-दिल में गीत तुम्हारे है तो फिर मुश्किल में सब से तुम्हे अगर हा आगे बढ़ना है तो बस मीठा मीठा बोलो
सौ मे से एक है बात पते की दिन हो सुरीला तो रात मज़े की सौ मे से एक है बात पते की दिन हो सुरीला तो रात मज़े की अपना यह माल अगर हाँ बेचना तुम को है तो बस मीठा मीठा बोलो लोगों का दिल अगर हा जितना तुमको है तो बस मीठा मीठा बोलो..


गीत भले ही वर्ष १९८० में लिखा गया हो लेकिन ज्ञान आज भी बाँट रहा है . यह अलग बात है की कुछ लोग सीधी बात में विश्वास  करते हैं और अपना परोक्ष - अपरोक्ष नुकसान क…

शिरपुर का विख्यात सितारा स्मिता पाटिल, अदाकारी के लिए आज भी मिसाल

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महाराष्ट्र के धुलिया जिले की शिरपुर तहसील में आगरा मुंबई महामार्ग पर स्थित दहिवद गाँव से गुजरते समय महान अदाकारा स्मिता पाटिल का स्मरण हो आता है. स्मिता पाटिल पब्लिक स्कूल वा शिरपुर सहकारी सूत गिरनी के सामने गुजरते हुए किसी  ना किसी से पता चल जाता है की स्मिता पाटिल का यहाँ से कोई गहरा सम्बन्ध है. हालांकि स्मिता पाटिल का जन्म 17 अक्टूबर, 1956 को पुणे में हुआ था , किन्तु उनके पिता शिवाजी  गिरधर पाटिल की शिरपुर राजनीतिक कर्म भूमि , पैत्रिक भूमि रही है. स्मिता पाटिल के पिता शिवाजीराव गिरधर पाटिल महाराष्ट्र सरकार में मंत्री, राज्यसभा सदस्य  और मां विद्या ताई पाटिल सामाजिक कार्यकर्ता थीं. स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में शिवाजीराव पाटिल व उनके भाई उत्तम नाना पाटिल का योगदान बताया जाता है. अंग्रेजों के खज़ाना लुटने की चिमठाना लूटकांड की घटना में इस परिवार का योगदान माना जाता है. खैर राजनीतिक पृष्ठ भूमि के कारण स्मिता पाटिल की योग्यता, व्यक्तित्व को हल्का नहीं माना जा सकता. उनकी अपनी एक विख्यात छवि रही है. 



अपने अभिनय वा अदाकारी से स्मिता पाटिल ने मात्र दस वर्ष के करियर में दर्शकों के बीच खास पह…

स्टेज डेयरिंग

यह है हमारी बिटिया रानी कनक ! मेरी पत्नी मोनिका चड्ढा ने कल बताया की रविवार को स्कूल के ऑडिटोरियम में लगभग पांच सौ बच्चों को फिल्म दिखानी थी . अचानक लेपटोप में कोई तकनिकी खराबी आ गई, तो कोई इंग्लिश गाना लगा दिया गया. कनक इतनी भीड़ में से उठ कर स्टेज पर गई और मुक्त स्वरुप में डांस करने लग गई. उसकी इस स्टेज डेयरिंग को देख कर सभी बच्चों ने चियर्प करना, तालियाँ बजाना प्रारंभ कर दिया. बाद में दुसरे बच्चे भी कनक को देख कर स्टेज पर आ गए. ग्रेट.... 



कनक का स्टेज परफोर्मेंस